Wednesday, December 31, 2008

HAPPY NEW YEAR - 2009



H ours of happy times with friends and family
A bundant time for relaxation
P rosperity
P lenty of love when you need it the most
Y outhful excitement at life’s simple pleasures

N ights of restful slumber
E verything you need
W ishing you love and light

Y ears and years of good health
E njoyment and mirth
A angels to watch over you
R embrances of a happy years!

Wednesday, December 24, 2008

आज का इंसान

मैं न था तो खुदा था, मैं होंकर बन्दा रह गया
उस से जुदा क्या हुआ, आँखों का अँधा रह गया

हर्फ़-ऐ-लिसां गुम थी तो था आदिल इक इंसान
दानिश एलान क्या हुआ, ज़बां से बंधा रह गया

(हर्फ़-ऐ-लिसां-language; आदिल-Righteous, दानिश-Wise)

आबाद उसकी रहमत से, घर आँगन मेरा हो गया
तर्ज़-ऐ-शाह-अना क्या हुआ, सीरत से मंदा रह गया

(तर्ज़-ऐ-शाह-अना- Of Kingly type)

न बशर का न हश्र का डर, ये इन्सां तो खुदा बन गया
मुक़द्दर का सिकंदर क्या हुआ, खुदी का कन्धा रह गया

वो दिल-ऐ-नौ-उम्र था, के इश्क रफी बन गया
'मौन' शायर क्या हुआ, नज़र का धंधा रह गया

*** Chander 'Maun'

Thursday, December 11, 2008

इंसान से बेहतर कुत्तों के नाम

कुत्तों का ज़िक्र हुआ तो न-शिनास (innocent) हम भी आ गए
रफीको (friends) रास्त्गी (honesty) में शुमार हमारा भी है
इन अज़ीम-उल-बैह्सः (monstrous politicians) को कुत्ता न पुकारा जाए
कुत्ते  ताज़ीम (respect) के हकदार, प्यार हमारा भी हैं


Monday, December 1, 2008

खुली आंखों से इक ख्वाब सा देखा है - Chander "Maun'

खुली आंखों से इक ख्वाब सा देखा है, हां ख्वाब ही तो है

इन्सान, इन्सानियत से भरपूर, 
मेरे अफ़कार (writings) मुहब्बत में चूर;
शब उसकी याद में गवाई हुई,
रौशनाई (ink) सुर्ख रुख्सार में नहायी हुई;
सहर (morning) उसके दीदों (eyes) में ट्मट्माई हुई, 
दोपहर अफ़्सुर्दा (intoxicated) गेसूओं (tresses) में बिताई हुई;
सर-ए-शाम उन लबों की मय के हवाले, 
जो बिगड़ी मेरी ज़िन्दगी को बना ले;
खुली आंखों से इक ख्वाब सा देखा है, हां ख्वाब ही तो है

हैरान हूं, उसके ज़बीं (forehead) पे सलवटें क्यों है,
यक़्लख्त (all of a sudden) रौशनाई ख़ून से सनी क्यों है;
क्या इन्सानी फ़ितरत फ़िर रंग बद्लने लगी है,
क्या इसकी रग़ों में अब नफ़रत दौड़्ने लगी है;
ये कौन सरकश (rebellion) हुजूम (crowd) को हांके जा रहा है,
ताबे-निशाते-बज़्म (happy and prosper society) को ठोकर से उडा रहा है
रोंद दो इसके इब्तदाई (about to begin)  न-पाक़ मन्सूबे (plans), मज़ाहिब (religions) से उपर उठो
ख़ुदायाने-दीं (so called authorities of religion) को सिखलाओ एक सबक, जेहाद से उपर उठो
खुली आंखों से इक ख्वाब सा देखा है, हां ख्वाब ही तो है

---------------------  - Chander "Maun'