तू कह भी दे बात दिल की, वक़्त का क्या है
अभी है लालाज़ार, कल बेवफा हो जायेगा
ये गेसू उलझने ना बन जायें, मेरे दिल की
अभी है छाओंदार, कल सब सफा हो जायेगा
इस तबस्सुम के हैं, जहाँ में शैदाई बहुत
अभी है इफ्तिखार, कल दफा हो जायेगा
इंतज़ार भी बनू, तो सिर्फ तेरी उम्मीद का
अभी है इज्तेरार, कल जफा हो जायेगा
Tuesday, December 1, 2009
इश्क मेरा तेरी इबादत
इश्क कोई रोग नहीं है, कोई रिश्ता नहीं है, ये एक लम्हा है जिसे जिया जा सकता है, क़ैद नहीं किया जा सकता | इस की उम्र पलों से ज्यादा नहीं होती | बाकी जो कुछ हम मुहब्बत के नाम पर कहते या सुनते हैं वो तिजारत है, ज़माने से इंसान की हासिल करने की ख्वाईश | रिश्ता फर्द को बहार खींचता है, जब की इश्क अन्दर का सफ़र है | दुनियादारी वाला इश्क मशरूत (conditional) है, रूहानी इश्क इबादत है, कोई शर्त नहीं |
मेरा इश्क इक अहसास है
तेरे मुस्तकबिल का सौदा नहीं
लम्हा-लम्हा जीता है
उम्र भर की प्यास नहीं
तुझे काबिज़ कर लूं इस क़दर
के रूह इधर जिस्म उधर
इश्क मेरा तेरी इबादत
सिर्फ निस्बत ना कोई आदत
पाने और खोने के दरमयान
जिस्म फ़क़त दीवार है
इस के परे है रब रहता
ना गिला ना शिकवा रखता
मेरा इश्क इक अहसास है
तेरे मुस्तकबिल का सौदा नहीं
लम्हा-लम्हा जीता है
उम्र भर की प्यास नहीं
तुझे काबिज़ कर लूं इस क़दर
के रूह इधर जिस्म उधर
इश्क मेरा तेरी इबादत
सिर्फ निस्बत ना कोई आदत
पाने और खोने के दरमयान
जिस्म फ़क़त दीवार है
इस के परे है रब रहता
ना गिला ना शिकवा रखता
Subscribe to:
Posts (Atom)